माँ कालरात्रि: स्वरूप, महत्व, पूजा विधि

माँ कालरात्रि: स्वरूप, महत्व, पूजा विधि

हिन्दू धर्म में माँ दुर्गा के नौ रूपों की उपासना विशेष रूप से नवरात्रि में होती है। इन नौ रूपों में सातवाँ स्वरूप माँ कालरात्रि का है। “काल” अर्थात समय और “रात्रि” अर्थात अंधकार। यानी वह शक्ति जो समय और अंधकार दोनों पर नियंत्रण रखती हैं।

माँ कालरात्रि को काली, श्यामवर्णा, नीलवर्णा, भद्रकाली आदि नाम से भी जाना जाता है। यह भय का अंत करने वाली देवी हैं। इनका स्वरूप भले ही उग्र हो, परन्तु भक्तों को अनंत कृपा और सुरक्षा प्रदान करती हैं।

माँ कालरात्रि

माँ कालरात्रि का दिव्य स्वरूप

माँ का शरीर गहरा कृष्ण वर्ण है।

केश खुले हुए और प्रचंड वायु में लहराते रहते हैं।

गर्दन से घनघोर ध्वनि वाले हार की शोभा।

तीनों नेत्र सदा अग्नि के समान चमकते हैं।

मुँह से अग्नि ज्वालाएँ निकलती रहती हैं।

वाहन – गर्दभ (गधा)

दाएं हाथ – वरमुद्रा एवं अभयमुद्रा

बाएं हाथ – लौह अस्त्र व कांटा

इनके दर्शन मात्र से ही समस्त नकारात्मक ऊर्जा, भूत-प्रेत, तांत्रिक प्रभाव और रोगों का नाश होता है।

माँ कालरात्रि का महत्व

 साधक के जीवन से भय, बाधा, शत्रु का नाश होता है

 अचानक घटनाओं, दुर्घटनाओं से रक्षा करती हैं

 आध्यात्मिक साधना को उंचाई पर पहुंचाती हैं

 गुप्त विद्याओं में साधकों को सिद्धि प्राप्त करने में मदद करती हैं

 कुंडली के पाप ग्रहों का प्रभाव शांत करती हैं

इन्हें रौद्र रूप काहा जाता है, लेकिन उनकी अंतरात्मा में माँ का वात्सल्य हमेशा विद्यमान रहता है।

जो बच्चा डरने से कांप रहा हो – उसी के लिए माँ अपना उग्र रूप दिखाती हैं ताकि उसका डर भाग जाए।

माँ कालरात्रि पूजा विधि (घर में सरल रूप में)

यदि आप नवरात्रि में माँ कालरात्रि का पूजन करना चाहते हैं, तो सुबह स्नान कर शुद्ध व वस्त्र धारण करें।

पूजा में निम्न सामग्री रखें—

 लाल कपड़ा

 काली चना

 गुड़

 लाल/सफेद पुष्प

 कपूर और धूप

पूजन प्रक्रिया

1. माँ को चंदन, कुमकुम और अक्षत अर्पित करें

2. गुड़ और काले चने का भोग लगाएँ

3. कालरात्रि स्तुति या दुर्गा सप्तशती का पाठ करें

4. जाप “ॐ क्लीं कालरात्र्यै नमः” कम से कम 108 बार करें

5. आरती कर शत्रु निवारण व भय से मुक्ति की प्रार्थना करें

माँ की कृपा से ग्रह बाधाएँ, विशेषकर राहु-केतु संबंधी कष्ट भी शांत होते हैं।

राहु-केतु और माँ कालरात्रि का विशेष संबंध

कालरात्रि देवी राहु और केतु के अशुभ प्रभाव को शांत करने वाली देवी मानी जाती हैं।

कुंडली में कालसर्प दोष, पितृ दोष, तांत्रिक बाधा या अजायब परेशानियों से जूझ रहे लोग इनकी विशेष पूजा करवाते हैं।

इसीलिए त्र्यंबकेश्वर (नाशिक) में किए जाने वाले कालसर्प दोष निवारण पूजा में भी देवी कालरात्रि का आह्वान बहुत महत्वपूर्ण होता है।

त्र्यंबकेश्वर – कालसर्प दोष मुक्ति का अद्वितीय तीर्थ

भगवान त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग के चरणों में कालसर्प दोष का निवारण सर्वाधिक प्रभावी माना गया है।

यहाँ हजारों लोग प्रतिदिन दोष मुक्ति के लिए आते हैं।

यह प्रक्रिया शास्त्रोक्त विधि, मंत्रोच्चार और देवी के आशीर्वाद से संपन्न होती है।

त्र्यंबकेश्वर में सर्वश्रेष्ठ कालसर्प पूजा – शिवेश गुरु जी

यदि आप भी कालसर्प दोष, पितृ दोष या राहु-केतु संबंधी पीड़ा से परेशान हैं,

तो त्र्यंबकेश्वर के प्रसिद्ध व अनुभवी आचार्य —

शिवेश गुरु जी

कालसर्प पूजा, नारायण नागबली, त्रिपिंडी श्राद्ध आदि शास्त्र सम्मत विधियों के उत्कृष्ट पंडित माने जाते हैं।

 दशकों का अनुभव

 वैदिक ब्राह्मण परिवार

 पूर्ण शास्त्रीय विधि से पूजा

 सभी यात्रियों को मार्गदर्शन

माँ कालरात्रि की कृपा से इनके द्वारा किए गए अनुष्ठान हजारों भक्तों को लाभ दे चुके हैं.

निष्कर्ष

माँ कालरात्रि भय का समापन नहीं करतीं, बल्कि आध्यात्मिक और भौतिक जीवन में हमारे आत्मविश्वास, रक्षा और सफलता का गदर वास्ता प्रस्तुत करती हैं। नवरात्रि के सातवें दिन इनका पूजन विशेष फलदायक माना जाता है। राहु-केतु के कष्ट और कालसर्प दोष आदि ग्रहदोष के समाधान के लिए भी माँ की पूजा प्रभावी है। अगर आप अपने जीवन से अज्ञात भय, बाधा और ग्रहदोष को निशान से मिटाना चाहते हैं — माँ कालरात्रि की कृपा और त्र्यंबकेश्वर में शिवेश गुरु जी द्वारा शास्त्रोक्त पूजा लाभकारी हो सकती है।

माँ कालरात्रि से जुड़े सामान्य प्रश्न

माँ कालरात्रि की पूजा कब करनी चाहिए?

नवरात्रि के सातवें दिन सर्वोत्तम, परंतु किसी भी शुभ तिथि में की जा सकती है।

क्या कालसर्प दोष में माँ कालरात्रि की पूजा उपयोगी है?

जी हाँ, राहु-केतु के दुष्प्रभाव को शांत करती हैं।

घर पर सरल रूप से पूजा कैसे करें?

काले चने, गुड़ और “ॐ क्लीं कालरात्र्यै नमः” मंत्र के साथ ध्यान करें।

कालसर्प पूजा कहाँ कराएँ?

त्र्यंबकेश्वर मंदिर, नाशिक में शास्त्रोक्त विधि से।

किस पंडित से संपर्क करें?

त्र्यंबकेश्वर में शिवेश गुरु जी कालसर्प पूजा के सर्वश्रेष्ठ पंडित माने जाते हैं।

कालसर्प दोष पूजा विधि: बुरे प्रभाव और समाधान | संपूर्ण जानकारी

कालसर्प दोष पूजा विधि: बुरे प्रभाव और समाधान | संपूर्ण जानकारी

वैदिक ज्योतिष में कालसर्प दोष एक ऐसा ग्रह योग है, जिसमें राहु और केतु के बीच सभी ग्रह आ जाते हैं। यह योग व्यक्ति के जीवन में मानसिक, आर्थिक, वैवाहिक और पारिवारिक क्षेत्रों में बहुत सारी बाधाएँ उत्पन्न कर सकता है। भगवान शिव की कृपा और उचित पूजा विधि से इस दोष के प्रभावों को शांत किया जा सकता है।

त्र्यंबकेश्वर (नासिक) में यह पूजा सदियों से बहुत प्रभावी मानी जाती है।

कालसर्प दोष पूजा विधि

कालसर्प दोष क्या होता है?

जब जन्म कुंडली के सभी ग्रह राहु-केतु के बीच होंगे और वे ग्रह किसी भी घर में होंगे, तब यह दोष होता है। यह 12 विभिन्न प्रकार का हो सकता है, जैसे:

अनंत कालसर्प

कुलिक कालसर्प

वासुकी कालसर्प

शंखपाल कालसर्प

पद्म कालसर्प

महारोषा कालसर्प

शेष कालसर्प आदि

हर तरह का दोष अलग-अलग जीवन क्षेत्रों को प्रभावित करता है।

कालसर्प दोष के बुरे प्रभाव 

जीवन क्षेत्र    होने वाले संभावित नकारात्मक प्रभाव      

करियर           बार-बार असफलता, नौकरी में अस्थिरता      

आर्थिक स्थिति   कर्ज, धन की हानि, आर्थिक बाधाएँ         

स्वास्थ्य       मानसिक तनाव, निद्रा समस्या, दुर्घटना योग

विवाह/प्रेम     संबंधों में असफलता, शादी में बाधा       

संतान सुख       गर्भधारण में कठिनाई या चिंता            

व्यवसाय         नुकसान, विवाद, धोखे का खतरा             

यह दोष जीवन में दुविधा बढ़ाता है लेकिन सही समाधानों से इसे शांत किया जा सकता है।

कालसर्प दोष पूजा क्यों आवश्यक है?

राहु और केतु के नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं

जीवन में बाधाओं का अंत होता है

भाग्य की विकास का मार्ग खुलता है

सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह

संबंध और करियर स्थिरता

कालसर्प दोष पूजा कैसे जहाँ कराई जाए?

हिंदू धर्म में कहा गया है कि:

त्र्यंबकेश्वर (नासिक)में की गई पूजा के लाभ अत्यंत सुफले माने जाते हैं।

यहाँ भगवान त्र्यंबकेश्वर शिव की special कृपा इस दोष से मुक्ति भी देती है।

कालसर्प दोष पूजा विधि

पूजा 2-3 घंटे में सम्पन्न होती है:

स्नान और शुद्धिकरण

गणेश पूजन तथा संकल्प

कालसर्प दोष शांति मंत्रों का जाप

नाग-नागिन प्रतिमा पूजन

अभिषेक और हवन

राहु-केतु दोष शांतिदायक अनुष्ठान

पितृ तर्पण (आवश्यकतानुसार)

 दान एवं पूर्णाहुति

पूजा के समय नाग-नागिन रूपी मूर्तियों को जल में प्रवाहित किया जाता है।

निष्कर्ष

कालसर्प दोष जीवन में संघर्ष बढ़ा सकता है, परंतु शिव भक्त है तो संकट नही*— यह सत्य है।

भगवान त्र्यंबकेश्वर शिव की कृपा और विधि-विधानयुक्त पूजा से जीवन में सफलता, शांति, समृद्धि, संबंधों में सुधार

निश्चित रूप से प्राप्त होते हैं। कालसर्प दोष जीवन में संघर्ष अवश्य देता है, लेकिन यह सफलता के द्वार भी खोलता है।

यदि सही समय पर सही स्थान पर और शिवेश गुरु जी जैसे विद्वान पंडित के निर्देशन में पूजा कराई जाए तो जीवन की दिशा बदल सकती है।

कालसर्प दोष पूजा विधि से जुड़े सामान्य प्रश्न

क्या कालसर्प दोष पूरी तरह खत्म हो जाता है?

पूजा के बाद दोष काफी हद तक शांत हो जाता है और जीवन में सुधार आता है।

पूजा कहाँ कराई जाए?

त्र्यंबकेश्वर का स्थान इस पूजा के लिए विशेष पवित्र माना गया है।

पूजा की फीस कितनी होती है?

कुंडली, विधि और सामग्री के अनुसार शुल्क भिन्न होता है।

क्या पूजा किसी भी दिन कराई जा सकती है?

हाँ, लेकिन सोमवार व श्रावण मास में इसका फल अधिक शुभ माना जाता है।

क्या इस दौरान व्रत की आवश्यकता होती है?

हाँ, पवित्रता व नियमों का पालन करना अनिवार्य है।

Reference – https://navbharattimes.indiatimes.com/astro/grah-nakshatra-in-hindi/kaal-sarp-dosh-puja-benefits-symptoms-puja-vidhi-kaal-sarp-dosh-ke-upay/articleshow/100844490.cms

घर पर रुद्राभिषेक कैसे करें? सम्पूर्ण मार्गदर्शन

घर पर रुद्राभिषेक कैसे करें? सम्पूर्ण मार्गदर्शन

भगवान शिव की उपासना का सर्वश्रेष्ठ रूप रुद्राभिषेक है। यह पूजा भगवान शिव को जल, दूध, घृत, शहद, बेलपत्र आदि चढ़ाकर की जाती है। विशेष रूप से सावन, सोमवारी, महाशिवरात्रि और किसी भी महत्वपूर्ण पर्व या शुभ दिन पर ही नहीं, लेकिन आप चाहें तो घर में भी पूरी विधि से रुद्राभिषेक कर सकते हैं।

रुद्राभिषेक से जीवन की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, रोग-शोक दूर होते हैं, ग्रहदोष शांत होते हैं और घर में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। यह पूजा वैवाहिक जीवन, करियर, स्वास्थ्य और संतान सुख के लिए भी अत्यंत शुभ फलदायी है।

घर पर रुद्राभिषेक कैसे करें? सम्पूर्ण मार्गदर्शन

सही समय रुद्राभिषेक करने के लिए

सुबह ब्रह्म मुहूर्त में या सूर्य उदय के बाद

सोमवार, सावन, श्रावण सोमवार, महाशिवरात्रि सर्वश्रेष्ठ

आवश्यक सामग्री

शिवलिंग (मार्बल/पारद/काले पत्थर का होना शुभ)

जल, गंगाजल

दूध, दही, घी, शहद, शक्कर (पंचामृत)

बेलपत्र, धतूरा, आक, भांग (ऐच्छिक)

फल, फूल, माला

चंदन, रोली, अक्षत

दीपक और धूप

सफेद कपड़ा

तांबे/पीतल का लोटा

कलश

शुद्ध आसन (कुशासन/लाल कपड़ा)

घर पर रुद्राभिषेक करने की विधि

शुद्धिकरण

पहले सबसे पहले घर को और पूजा स्थल को शुद्ध करें

स्वयं स्नान करें और साफ वस्त्र पहनें

कलश में जल भरकर पास रखें

संकल्प लें

अपने उद्देश्य के अनुसार संकल्प लें जैसे — स्वास्थ्य, शांति, समृद्धि आदि।

दीप प्रज्वलन

दीपक जलाएँ, धूप जलाएँ, भगवान शिव पर अपना ध्यान केंद्रित करें।

चरण अभिषेक

प्रत्येक चरण में आप “ॐ नमः शिवाय” या रुद्र मंत्र का जाप क रहिए।

चरण

क्या अर्पित करना होगा

लाभ

जल और गंगाजल

मन और शरीर की शांति

दूध

चंद्र दोष और तनाव दूर

दही

संबंध मधुर होते हैं

घी

रोग नाश और सौभाग्य

शहद

वाणी में मिठास

शक्कर

मंगल और स्वास्थ्य

बेलपत्र

शिव की विशेष प्रिय वस्तु

इसके बाद पंचामृत से फिर से अभिषेक किएँ। अंत में शुद्ध गंगाजल से शिवलिंग की साफी करनी है।

श्रंगार व पूजन

बिल्व पत्र (3 पत्तियों वाला), फूल, चंदन अर्पित करें

धतूरा, भांग केवल यदि आपके पास उपलब्ध और पूजा नियमों के अनुसार हो

मंत्र जाप

आप नीचे दिए मंत्रों में से किसी का भी जाप कर सकते हैं —

पंचाक्षरी मंत्र:

ॐ नमः शिवाय

महामृत्युंजय मंत्र:

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्

ऊर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥

आठ स्त्रोतों का पाठ करें

पूजा के बाद

शिवजी को भोग लगाएँ — फल, पंचामृत या प्रसाद

आरती करें — “जय शिव ओंकारा”

प्रसाद सभी को वितरित करें

 रुद्राभिषेक में ध्यान रखने योग्य सावधानियाँ

शिवलिंग पर हल्दी नहीं चढ़ाई जाती

तांबे के बर्तन में कभी भी भूलकर भी गंगाजल + दूध एक साथ न रखें

बेलपत्र उलटे न चढ़ाएँ

चावल टूटे हुए न हों

प्रसाद खाने योग्य व शुद्ध हो

रुद्राभिषेक के अद्भुत लाभ

मानसिक शांति और नकारात्मक ऊर्जा का नाश

ग्रहदोष शांत — विशेषकर कालसर्प दोष, शनि और चंद्र दोष

आर्थिक स्थिति में सुधार

अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घायु की प्राप्ति

पारिवारिक तनाव और मुकदमेबाजी से छुटकारा

संतान सुख का आशीर्वाद

निष्कर्ष

रुद्राभिषेक साधारण लेकिन अत्यंत प्रभावशाली पूजा है। यदि इसे श्रद्धा व पूर्ण विधि से किया जाए, तो भगवान शिव तुरंत प्रसन्न होकर भक्तों की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण करते हैं। अगर आप कालसर्प दोष, नारायण नागबली पूजा, पितृ दोष निवारण, या रुद्राभिषेक विशेष रूप से त्र्यंबकेश्वर मंदिर में कराना चाहते हैं, तो त्र्यंबकेश्वर के श्रेष्ठ और अनुभवी पंडित शिवेश गुरु जी आपके लिए सबसे उचित मार्गदर्शक हैं। उनकी पूजा विधियाँ पूरी तरह शास्त्रोक्त और प्रमाणिक हैं, तथा उनके द्वारा कराए गए अनुष्ठानों से लाखों भक्तों को लाभ मिला है।

रुद्राभिषेक से जुड़े सामान्य प्रश्न

घर पर रुद्राभिषेक करने के लिए कौन कौन से व्यक्ति योग्य हैं?

कोई भी श्रद्धालु व्यक्ति ब्रह्म मुहूर्त या शुभ दिन पर कर सकता है।

क्या महिलाएं रुद्राभिषेक कर सकती हैं?

हाँ, पूर्ण रूप से (रजस्वला के दिनों को छोड़कर)

शिवलिंग पर क्या नहीं रखना चाहिए?

हल्दी, नारियल पानी, टूटा चावल, तुलसी पत्र।

अनिवार्य किस मंत्र का जाप है?

करीब 108 बार कम से कम ॐ नमः शिवाय का जाप करना चाहिए।

रुद्राभिषेक हर दिन किया जा सकता है क्या?

जी हां, लेकिन विशेषतः सोमवार ही शुभ होता है।

Reference – https://housing.com/news/hi/how-to-perform-rudrabhishek-puja-at-home-hi/

घर पर पितृ दोष पूजा कैसे करें? संपूर्ण मार्गदर्शिका

घर पर पितृ दोष पूजा कैसे करें? संपूर्ण मार्गदर्शिका

पितर (आगत्य) सुरक्षा और समृद्धि के रक्षक होते हैं। जब पितरों का शिकारों जैसा क्रूर योग सूर्य, चंद्रमा या अन्य ग्रहों पर जन्म कुंडली में दिखाई देता है, तब पितृ दोष कहलाता है। पितृ दोष रहने से जीवन में बाधाएँ, आर्थिक संकट, संतान सुख में विलंब, पारिवारिक कलह, स्वास्थ्य समस्याएँ और आकस्मिक परेशानियाँ बनी रहती हैं।

आमतौर पर पितृ दोष निवारण के लिए त्र्यंबकेश्वर (नासिक), गया (बिहार), उज्जैन, हरिद्वार जैसे तीर्थों में पूजा की जाती है, लेकिन अगर किसी कारणवश व्यक्ति वहाँ न जा सके, तो घर पर भी पितृ दोष पूजा और उपाय करके राहत पाई जा सकती है।

घर पर पितृ दोष पूजा कैसे करें?

पितृ दोष क्यों होता है?

पूर्वजों की आत्मा की शांति न होने पर

परिवार में अनजाने में किए गए पाप

पूर्वजों के श्राद्ध और तर्पण का न होना

किसी मृत परिवारजन की अधूरी इच्छाएँ

अचानक मृत्यु या दुर्घटना में हुए निधन

पितृ दोष के मुख्य लक्षण

बार-बार आर्थिक हानि

संतान प्राप्ति में बाधा

विवाह में विलंब या संबंध टूटना

दिष्टी विषमय स्थितियाँ घर में निरंतर अशांति और बीमारियाँ

नौकरे-धंधे में असफलता

साधना और पूजा का फल न मिलना

यदि इनमें से कई लक्षण दिखाई दें, तो पितृ दोष की संभावना होती है।

पितृ दोष पूजा विधि घर पर

पूजा के लिए आवश्यक सामग्री 

सामग्री                                   उपयोग

तांबे का लोटा पानी सहित                                                       तर्पण के लिए

काले तिल                                                                    पितरों को तर्पण हेतु       

 सफेद पुष्प                                                                      अर्पण हेतु

कुशा (दूब)                                                                        धार्मिक शुद्धि

धूप, दीप, कपूर                                                                   पूजा व्यवस्था

पंचामृत                                                                                नैवेद्य

पितर भोज (ब्राह्मण भोजन)                                                  पुण्य लाभ हेतु

पितृ पक्ष (श्राध पक्ष)

सोमवार या शनिवार

इन दिनों में पूजन को अधिक फलदायी माना जाता है।

पूजा प्रक्रिया 

(1) स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करें

पूजा घर को साफ रखें और पूर्व या उत्तर दिशा की ओर बैठें।

(2) दीपक जलाएँ

घी या सरसों के तेल का दीप जलाएँ।

(3) संकल्प करें

अपने पितरों का नाम और गोत्र लेते हुए

“मेरे पूर्वजों की आत्मा की शांति और मोक्ष प्राप्ति के लिए यह पितृ दोष पूजा कर रहा/रही हूँ।”

(4) कुशा या दूब रखें

पवित्रता का प्रतीक।

(5) पितरों का ध्यान और आहुति

तांबे के लोटे में पानी भरें, काले तिल और फूल डालें।

दाहिने हाथ की अंजलि बनाकर यह मंत्र बोलते हुए तर्पण दें—

“ॐ पितृदेवाय नमः।”

“ॐ सरस्वत्यै स्वधा नमः।”

“ॐ पितृभ्यो स्वधा नमः।”

(6) मंत्र और स्तोत्र का पाठ पितरों के लिए

पितृ गायत्री मंत्र

“ॐ पितृभ्यो विद्महे जगत धाराय धीमहि तन्नो पितृ प्रचोदयात्।”

शिव मंत्र

“ॐ नमः शिवाय”

महा मृत्युंजय मंत्र

108 बार जपने पर श्रेष्ठ माना गया है।

(7) ब्राह्मण भोजन / पितर भोजन

अगर संभव हो तो ब्राह्मण या गरीब को भोजन कराएँ।

(8) दान

कपड़े, अनाज, काला तिल, और आवश्यकता का सामान दें।

पूजा के समय ध्यान रखने वाली बातें

सही पूजा का निष्ठापूर्ण पालन करने के लिए सलाहें

भोजन सात्त्विक रखें

 द्रोह, झूठ और अपशब्दों से बचें

सभी परिवार के सदस्य शामिल हों

 पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता रखें

घर पर प्रतिदिन का छोटा पितृ दोष उपाय

शाम के समय घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाएँ

रविवार को कौओं या गाय को भोजन कराएँ

प्रतिदिन शिवलिंग पर जल चढ़ाएँ

हर अमावस्या पर तर्पण करें

धार्मिक विशेषज्ञ की सहायता क्यों आवश्यक?

यदि पितृ दोष कुंडली में अत्यधिक प्रभावी हो, तो घर पर पूजा हमेशा काफी नहीं होती। ऐसे में त्र्यंबकेश्वर, नासिक में विशेष नारायण नागबली व पितृ दोष निवारण पूजा करना यथातथ होता है।

 निष्कर्ष

पितृ दोष जीवन में गंभीर बाधाएँ उत्पन्न करता है, लेकिन सही विधि से पूजा और पूर्वजों का सम्मान करते हुए इसे कम या नष्ट किया जा सकता है।

यदि आप पितृ दोष या कालसर्प दोष से बेबस हैं, तो त्र्यंबकेश्वर में अनुभवी और विश्वसनीय गुरु जी से मार्गदर्शन लेना सबसे उत्तम है। त्र्यंबकेश्वर में कालसर्प पूजा के लिए शिवेश गुरु जी सबसे ज्यादा अनुभवी और विश्वसनीय पंडितों में से एक हुए हैं।  उनके द्वारा विधि-विधान के साथ पूजा करने से हजारों लोगों को लाभ मिला है।

घर पर पितृ दोष पूजा कैसे करें से जुड़े सामान्य प्रश्न

क्या पितृ दोष हमेशा अशुभ होता है?

हाँ, यह जीवन में बाधाएँ और असफलताएँ लाता है।

क्या केवल पितृ पक्ष में ही पूजा करनी चाहिए?

हाँ, अमावस्या और विशेष दिनों पर भी की जा सकती है।

घर पर पूजा करने से पूरी तरह दोष समाप्त हो जाता है?

यदि दोष हल्का हो तो हाँ।
यदि दोष गहरा हो तो त्र्यंबकेश्वर में विशेष पूजा आवश्यक होती है।

 बिना ब्राह्मण के पूजा संभव है?

हाँ, यदि सही विधि और मंत्रों के साथ श्रद्धापूर्वक की जाए।

Reference – https://www.quora.com/What-is-the-method-of-performing-Pitra-Dosha-Puja-at-home

कालसर्प योग कैसे दूर करें? त्र्यंबकेश्वर में कालसर्प दोष पूजा

कालसर्प योग कैसे दूर करें? त्र्यंबकेश्वर में कालसर्प दोष पूजा

ज्योतिष में कालसर्प योग एक प्रमुख ग्रहदोष समझा जाता है, जो तब गठित होता है जब जन्मकुंडली के सभी ग्रह राहु और केतु के बीच होंगे। यह योग जीवन में विभिन्न प्रकार की बाधाएँ, संघर्ष, मानसिक चिंता और असफलता ला सकता है। लेकिन हर व्यक्ति को इस दोष का एक समान प्रभाव नहीं भुगतना पड़ता — यह कुंडली की स्थिति पर निर्भर करता है।

कालसर्प योग कैसे दूर करें?

कालसर्प योग के प्रभाव

उन व्यक्तियों की कुंडली में जो इस दोष को हो, उन्हें जीवन में निम्नलिखित समस्याएँ हो सकती हैं—

 बार-बार बाधाएँ और निराशा

 करियर या व्यवसाय में असफलता

 विवाह में देरी या वैवाहिक समस्याएँ

 आर्थिक अस्थिरता

 मानसिक तनाव, डर और बेचैनी

 परिवार में असहमति

 संतान संबंधी परेशानियाँ

ध्यान दें — भयभीत होने के बजाय सही उपाय और पूजा से इसका समाधान संभव है।

कालसर्प योग कितने प्रकार का होता है? 

ज्योतिष में इसका विभाजन 12 भागों में किया गया है, जैसे—

अनन्त, कुलिक, वासुकी, शंखपाल, पद्म, महापद्म, तक्षक, कर्कोटक आदि।

हर प्रकार विभिन्न क्षेत्रों में बाधाएँ पैदा करता है। इसलिए पूजा भी दोष के प्रकार के अनुसार कराई जानी चाहिए।

कालसर्प योग हटाने के प्रभावी उपाय

यदि आपकी कुंडली में यह दोष हो, तो आप निम्न उपाय अपना सकते हैं—

त्र्यंबकेश्वर में कालसर्प दोष पूजा

नाशिक (महाराष्ट्र) में स्थित त्र्यंबकेश्वर मंदिर में भगवान त्र्यंबकेश्वर का स्वयं रूप लिंग रूप में विद्यमान हैं। यहाँ कालसर्प दोष निवारण पूजा विशेष फलदायी मानी गई है।

पूजा के समय—

 राहु-केतु शांति हो जाती है

 पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है

 ग्रहदोष निवारण होता है

 मन में शांति और आत्मविश्वास प्राप्त होता है

नाग-पंचमी और शिवरात्रि पर विशेष उपाय

 शिवलिंग पर दूध और जल से अभिषेक

 नाग-देवता की पूजा

 महामृत्युंजय जाप

दान और सेवा

 काले तिल, उड़द, फल, और कपड़ा दान

 गरीबों व साधु-संतों को भोजन

मंत्र जाप

 ॐ नमः शिवाय

 राहु बीज मंत्र

 काल भैरव मंत्र

पूजा कब करानी चाहिए?

 कुंडली में राहु-केतु की स्थिति प्रभावित कर रही हो

 जीवन में लगातार संघर्ष हो रहे हों

 विवाह/संतान संबंधित रुकावटें हों

 जन्मदिन के आस-पास करना विशेष शुभ माना जाता है

पूजा दो प्रमुख तिथियों में भी अधिक फलदायक मानी जाती है—

 नाग पंचमी

 महाशिवरात्रि

पूजा का सही स्थान — त्र्यंबकेश्वर क्यों?

 त्र्यंबकेश्वर राहु-केतु दोष निवारण का केन्द्रीय स्थल है

 प्राचीन शास्त्रीय विधान के अनुसार यहां पूजा उत्तम मानी जाती है

 पवित्र गोदावरी नदी का तट होने की वजह से इसका अधिक महत्व होता है

पूजा कौन कराए? (योग्य पंडित का चयन)

कालसर्प दोष पूजा को विशेष विद्वान और अनुभवी पंडित ही करनी चाहिए, क्योंकि इसका संपूर्ण विधि-विधान और मंत्र उच्चारण अत्यंत महत्वपूर्ण है।

त्र्यंबकेश्वर के सुविख्यात और विश्वसनीय पंडित शिवेश गुरु जी

कालसर्प दोष, नारायण नागबली और पितृ दोष पूजा के अनुभवी विशेषज्ञ माने जाते हैं।

उनके मार्गदर्शन में पूजा कराने से लोगों को बेहतर परिणाम प्राप्त हुए हैं।

(यह जानकारी धार्मिक मान्यता पर आधारित है)

पूजा से मिलने वाले लाभ

 मुक्ति नकारात्मक ऊर्जा और ग्रहबाधा से

 सफलता करियर और व्यवसाय में

 परिवार में सुख-शांति

 आत्मविश्वास और मानसिक शांति

 शुभता और अवसरों का मार्ग प्रशस्त जीवन में

निष्कर्ष

कालसर्प योग जीवन में संघर्ष बढ़ा सकता है, लेकिन सही पूजा और शिवेश पंडित के मार्गदर्शन से इससे राहत मिलनासंभव है। यदि आप इस दोष से प्रभावित हैं, तो त्र्यंबकेश्वर में कालसर्प दोष पूजा कराना एक उत्तम उपाय है। विश्वसनीय पंडित की भूमिका इसमें सबसे महत्वपूर्ण होती है — और इसके लिए शिवेश गुरु जी श्रेष्ठ विकल्प माने जाते हैं।

कालसर्प योग से जुड़े सामान्य प्रश्न

क्या हर कालसर्प योग का प्रभाव समान होता है?

नहीं, यह कुंडली में ग्रहों की स्थिति पर निर्भर करता है।

पूजा कितने दिन की होती है?

आमतौर पर 1 या 2 दिन में संपन्न हो जाती है।

क्या पूजा के बाद परिणाम तुरंत दिखाई देते हैं?

कभी-कभी तुरंत सुधार दिखता है, और कभी समय के साथ सकारात्मक बदलाव आते हैं।

पूजा कौन-कौन कर सकते हैं?

जिसकी कुंडली में कालसर्प योग हो या जिसे जीवन में बाधाएँ लगातार मिल रही हों।

क्या यह पूजा साल में एक बार दोहरानी चाहिए?

कुछ मामलों में पंडित जी के सुझाव अनुसार दोहराई भी जा सकती है।

Reference – https://www.amarujala.com/photo-gallery/astrology/jyotish-know-about-kaalsarp-yog-and-its-type-and-impact-of-kaalsarp-yog-in-your-life-rahu-ketu

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